नई दिल्ली । भारत में मैसेजिंग प्लेटफॉर्म Telegram पर लगे अस्थायी प्रतिबंध के बीच बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। प्लेटफॉर्म के सीईओ Pavel Durov ने भारतीय टेलीकॉम सेक्टर की प्रमुख कंपनी Reliance Industries Limited पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि कुछ नेटवर्क स्तर की गतिविधियों के जरिए टेलीग्राम की एक्सेस को प्रभावित किया जा रहा है। इस बयान के बाद तकनीकी और राजनीतिक दोनों ही क्षेत्रों में चर्चा तेज हो गई है।
दुरोव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दावा किया कि रिलायंस द्वारा कथित रूप से बीजीपी हाइजैकिंग जैसे तकनीकी तरीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे भारत के बाहर के यूजर्स को भी टेलीग्राम की सेवाओं तक पहुंच में बाधा आ रही है। उन्होंने इसे प्रतिस्पर्धा से जुड़ा मामला बताते हुए कहा कि इससे उपयोगकर्ताओं की इंटरनेट स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है। हालांकि इन आरोपों के समर्थन में किसी स्वतंत्र तकनीकी प्रमाण की आधिकारिक पुष्टि अब तक सामने नहीं आई है।
इस विवाद के बीच WhatsApp और उसकी पैरेंट कंपनी Meta Platforms Inc का भी उल्लेख सामने आया है। दुरोव ने इशारा किया कि बाजार में प्रतिस्पर्धा को लेकर इस तरह की गतिविधियां हो सकती हैं, जिससे अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स को लाभ पहुंचाया जा सके। हालांकि संबंधित कंपनियों की ओर से इस पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सरकारी स्तर पर टेलीग्राम पर यह अस्थायी प्रतिबंध नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के निर्देशों के बाद लगाया गया है। National Testing Agency के अनुसार, NEET (UG) 2026 Re-Exam से जुड़े मामलों में कुछ फ्रॉड नेटवर्क द्वारा टेलीग्राम ग्रुप्स के दुरुपयोग की आशंका सामने आई थी। इसी कारण आईटी नियमों के तहत प्लेटफॉर्म पर सीमित अवधि के लिए रोक लगाई गई है।
दुरोव ने इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि किसी भी प्लेटफॉर्म पर कार्रवाई के बजाय जिम्मेदार व्यक्तियों पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि इस तरह के प्रतिबंध से करोड़ों यूजर्स प्रभावित होते हैं, जबकि असली समस्या बनी रहती है। इसी बीच टेलीग्राम ने इस आदेश को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है, जिससे मामला अब कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है।
तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, यह पूरा विवाद केवल एक प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सुरक्षा और प्रतिस्पर्धात्मक रणनीतियों जैसे कई पहलू शामिल हैं। बीजीपी रूटिंग और इंटरनेट ट्रैफिक मैनेजमेंट जैसे तकनीकी मुद्दों के कारण इस तरह के आरोपों की जांच करना जटिल प्रक्रिया होती है।
फिलहाल स्थिति यह है कि सरकार की ओर से प्रतिबंध अस्थायी है और अदालत में सुनवाई के बाद आगे की दिशा तय होगी। वहीं, टेलीग्राम और इसके संस्थापक की ओर से लगाए गए आरोपों ने डिजिटल स्वतंत्रता और प्रतिस्पर्धा की बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है।
