iPhone मैन्युफैक्चरिंग में भारत की बढ़ती पकड़
रिपोर्ट्स के अनुसार, अब अमेरिका में बिकने वाले 70% से ज्यादा iPhones भारत में तैयार हो रहे हैं। इसमें Tata Electronics और Foxconn जैसी कंपनियों की अहम भूमिका है।
टाटा की एंट्री और लगातार बढ़ते निवेश ने भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग मैप पर मजबूत स्थिति दिलाई है।
₹1,500 करोड़ निवेश से बड़ा विस्तार
Tata Sons ने अपनी इलेक्ट्रॉनिक्स यूनिट की अधिकृत पूंजी बढ़ाकर ₹6,250 करोड़ कर दी है। इससे साफ संकेत मिलता है कि कंपनी आने वाले वर्षों में उत्पादन क्षमता को कई गुना बढ़ाने की तैयारी में है।
इसके अलावा, टाटा ने पहले ही Pegatron की भारत यूनिट में 60% हिस्सेदारी खरीदकर iPhone सप्लाई चेन में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है।
लगातार बढ़ रहा निवेश और उत्पादन क्षमता
FY26 में Tata Group ने लगभग ₹3,000 करोड़ का निवेश Tata Electronics में किया है।
पिछले कुछ वर्षों में कंपनी ने अपने इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबार का तेजी से विस्तार किया है, जिससे उत्पादन और निर्यात दोनों में बढ़ोतरी हुई है।
FY25 में कंपनी की ऑपरेटिंग इनकम बढ़कर ₹66,206 करोड़ पहुंच गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में कई गुना वृद्धि दर्शाती है।
सेमीकंडक्टर में भी बड़ा दांव
टाटा सिर्फ iPhone मैन्युफैक्चरिंग तक सीमित नहीं है। कंपनी अब सेमीकंडक्टर सेक्टर में भी भारी निवेश कर रही है।
गुजरात में लगभग $14 बिलियन का फेब्रिकेशन प्लांट
असम में चिप असेंबली और टेस्टिंग यूनिट
ये दोनों प्रोजेक्ट भारत को टेक्नोलॉजी आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत करेंगे।
भारत बन सकता है ग्लोबल टेक हब
विशेषज्ञों का मानना है कि टाटा और Apple की साझेदारी भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का वैश्विक केंद्र बना सकती है।
चीन के दबदबे को चुनौती देते हुए भारत तेजी से नई सप्लाई चेन का मजबूत हिस्सा बनता जा रहा है।
