हादसे को लेकर पहली थ्योरी ट्रक के ब्रेक फेल होने की है। ड्राइवर ने पुलिस को बताया कि वाहन के ब्रेक ने काम करना बंद कर दिया था। पुलिस भी शुरुआती स्तर पर इस संभावना की जांच कर रही है। भारी वाहनों में एयर ब्रेक का इस्तेमाल होता है और लंबी ढलान पर लगातार ब्रेक लगाने से उनकी कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। ट्रक में तकनीकी खराबी थी या नहीं इसकी पुष्टि क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय की जांच से हो सकेगी। वाहन के ब्रेक टायर गियर और उसमें लदे धान के वास्तविक वजन की जांच भी महत्वपूर्ण होगी।
दूसरी थ्योरी ड्राइवरों की गलती और रास्ते को लेकर भ्रम की है। पुलिस की शुरुआती जानकारी के मुताबिक दोनों ट्रक चालक रास्ते से अनजान थे और गूगल मैप की मदद से आगे बढ़ रहे थे। एक रिपोर्ट के अनुसार टोल टैक्स बचाने के लिए शॉर्टकट तलाशने की बात भी सामने आई है। अमरोल गांव के कुछ लोगों ने दावा किया कि उन्होंने ड्राइवरों को आगे रास्ता बंद होने की जानकारी दी थी लेकिन वे गूगल मैप पर रास्ता खुला होने की बात कह रहे थे। ग्रामीणों ने ड्राइवरों के मुंह से शराब की गंध आने का दावा भी किया है। इसकी पुष्टि के लिए मेडिकल जांच और ब्लड रिपोर्ट जरूरी होगी।
तीसरी थ्योरी मंदिर समिति की ओर से उठाई गई साजिश की आशंका है। समिति के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह गुर्जर ने धार्मिक आयोजन को जानबूझकर निशाना बनाए जाने की संभावना जताते हुए एसआईटी जांच की मांग की है। हालांकि अब तक पुलिस या प्रशासन ने आतंकी हमले की पुष्टि नहीं की है। ट्रक का चेकिंग पॉइंट पार करना और बैरिकेड तोड़ते हुए मंदिर की ओर बढ़ना जांच के अहम बिंदु हैं। वहीं ट्रक मालिक का कहना है कि वाहन रास्ता तलाशते हुए आगे बढ़ा था। हादसे के बाद ड्राइवर और मालिक के भागने की घटना भी जांच का हिस्सा है लेकिन केवल इससे साजिश साबित नहीं होती।
जांच में ट्रक की तकनीकी स्थिति के साथ ड्राइवरों की मेडिकल रिपोर्ट मोबाइल लोकेशन गूगल मैप का रिकॉर्ड माल से जुड़े दस्तावेज और रास्ते में लगे सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल की जा सकती है। ग्रामीणों पुलिसकर्मियों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी घटना की कड़ियां जोड़ने में मदद करेंगे। यदि लापरवाही साबित होती है तो भारतीय न्याय संहिता के तहत कार्रवाई हो सकती है। वहीं गैर इरादतन हत्या या आतंकी कृत्य जैसे गंभीर आरोपों के लिए संबंधित कानूनी तत्वों और पर्याप्त सबूतों का होना जरूरी है।
हादसे ने मेले की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। सामान्य तौर पर मंदिर समिति भीड़ की जानकारी देने और व्यवस्थाओं में सहयोग करती है जबकि पुलिस यातायात नियंत्रण और कानून व्यवस्था संभालती है। जिला प्रशासन विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की जिम्मेदारी निभाता है। रिपोर्टों के मुताबिक मंदिर से करीब एक किलोमीटर दूर पार्किंग बनाई गई थी और रात में 50 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात थे। इसके बावजूद भारी ट्रक प्रतिबंधित क्षेत्र तक कैसे पहुंच गए यह जांच का अहम सवाल है। चेकिंग पॉइंट पर ट्रक रोकने को लेकर पुलिस के बयान और ग्राउंड रिपोर्ट में अंतर भी सामने आया है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर झांसी रोड के सीएसपी रवि भदौरिया को हटाया गया और तीन थाना प्रभारियों समेत आठ पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया। कलेक्टर रुचिका चौहान ने मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं और सात दिन में रिपोर्ट देने को कहा गया है। हालांकि चेकिंग पॉइंट की जिम्मेदारी और कार्रवाई के दायरे को लेकर सवाल बने हुए हैं। सरकार ने मृतकों के परिजनों और घायलों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की है जबकि पीड़ित परिवार अधिक मुआवजे और सरकारी नौकरी की मांग कर रहे हैं। अब जांच से यह स्पष्ट होना बाकी है कि हादसा तकनीकी खराबी या मानवीय लापरवाही का नतीजा था अथवा इसके पीछे कोई दूसरी वजह थी। साथ ही यह भी तय करना होगा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा में हुई चूक के लिए किस स्तर पर जवाबदेही बनती है।
