यह बैठक मध्यप्रदेश के प्रशासनिक ढांचे के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। समिति अधिकारियों की गोपनीय रिपोर्ट, सेवा रिकॉर्ड और वरिष्ठता सहित निर्धारित मानकों के आधार पर उनके नामों का मूल्यांकन करेगी। इसके बाद तय होगा कि आईएएस अवॉर्ड के लिए किन अधिकारियों के नामों को मंजूरी मिलती है।
इन 13 अधिकारियों के नाम सूची में शामिल
प्रस्तावित सूची में सामान्य प्रशासन विभाग के उप सचिव जयेंद्र कुमार विजयवत का नाम शामिल है। राज्य निर्वाचन आयोग में उप सचिव मनोज मालवीय और परिवहन विभाग के उप सचिव कमल नागर भी आईएएस अवॉर्ड के दावेदारों में हैं।
इसके अलावा शहडोल की अपर कलेक्टर मिनिषा पांडेय, भोपाल जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी इला तिवारी और इंदौर संभाग में उपायुक्त (राजस्व) सपना एम. लोवंशी का नाम भी सूची में शामिल है। बुरहानपुर की अपर कलेक्टर नीता राठौर और शाजापुर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी शैलेंद्र सिंह सोलंकी भी इस दौड़ में हैं।
अन्य दावेदारों में भोपाल स्थित लोकायुक्त कार्यालय की उप सचिव रानी पासी, आयुष विभाग की उप सचिव रंजना देवड़ा, महिला एवं बाल विकास विभाग की उप सचिव माधवी नागेंद्र और पर्यावरण विभाग की उप सचिव वर्षा सोलंकी शामिल हैं। माध्यमिक शिक्षा मंडल की अतिरिक्त सचिव प्रियंका गोयल का नाम भी प्रस्तावित 13 अधिकारियों की सूची में है।
चार विवादित नामों पर क्यों टिकी नजरें?
आईएएस अवॉर्ड की प्रक्रिया में चार नामों को लेकर विवाद की चर्चा है। महीप किशोर तेजस्वी के नाम पर कांग्रेस नेता केके मिश्रा ने आपत्ति दर्ज कराई है। वहीं, आरटीआई कार्यकर्ता अजय दुबे ने सपना एम. लोवंशी के नाम पर विरोध जताया है।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि सामान्य प्रशासन विभाग ने इन आपत्तियों को स्वीकार किया है या नहीं। यह भी साफ नहीं है कि तेजस्वी और लोवंशी उन चार अधिकारियों में शामिल हैं या नहीं, जिनके नामों को लेकर विवाद बताया जा रहा है। इसलिए अंतिम सूची में इन अधिकारियों की स्थिति का पता बैठक के निर्णय के बाद ही चलेगा।
चार नाम अटके तो इन अधिकारियों को मिल सकता है मौका
यदि विवादित नामों पर सहमति नहीं बनती है या कुछ नाम चयन प्रक्रिया में आगे नहीं बढ़ पाते हैं, तो वरिष्ठता क्रम में अन्य अधिकारियों पर विचार किया जा सकता है। संभावित विकल्पों में हरदा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी नरोत्तम प्रसाद भार्गव, मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग में अपर नियंत्रक निधि सिंह राजपूत, सामान्य प्रशासन विभाग के कार्मिक शाखा में उप सचिव निमिषा जायसवाल और उज्जैन जिला पंचायत एवं विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी संदीप कुमार सोनी के नाम शामिल हैं। हालांकि, इन अधिकारियों के चयन की संभावना भी अंतिम मूल्यांकन और उपलब्ध पदों के आधार पर तय होगी।
चार श्रेणियों में होगा अधिकारियों का मूल्यांकन
प्रस्तावित 39 अधिकारियों के नामों पर विचार करते समय उनकी गोपनीय चरित्रावली (CR) और वरिष्ठता को महत्व दिया जाएगा। मूल्यांकन के तहत अधिकारियों को आउटस्टैंडिंग, वेरी गुड, गुड और अनफिट जैसी श्रेणियों में रखा जा सकता है। पहले आउटस्टैंडिंग श्रेणी के अधिकारियों पर विचार होगा। इसके बाद उपलब्ध कोटे के अनुसार वेरी गुड और गुड श्रेणी के अधिकारियों के नामों पर विचार किया जाएगा।
यह प्रक्रिया सामान्य पदोन्नति से अलग है। इसे योग्यता के आधार पर नियुक्ति की प्रक्रिया माना जाता है। इसमें अधिकारियों की पिछले पांच वर्षों की गोपनीय रिपोर्ट महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसी कारण किसी अधिकारी की वर्तमान वरिष्ठता के बावजूद उसका चयन मूल्यांकन के परिणाम पर निर्भर कर सकता है।
अब दिल्ली में होने वाली बैठक के निर्णय से तय होगा कि मध्यप्रदेश के किन अधिकारियों को आईएएस अवॉर्ड मिलता है। साथ ही विवादित नामों की स्थिति और संभावित वैकल्पिक अधिकारियों के चयन को लेकर भी तस्वीर स्पष्ट होने की उम्मीद है।
